ऋग्वेद (मंडल 3)
इळा॑मग्ने पुरु॒दंसं॑ स॒निं गोः श॑श्वत्त॒मं हव॑मानाय साध । स्यान्नः॑ सू॒नुस्तन॑यो वि॒जावाग्ने॒ सा ते॑ सुम॒तिर्भू॑त्व॒स्मे ॥ (७)
हे अग्नि! यज्ञ करने वाले मुझ यजमान को सदा अनेक कर्मो की साधनरूप गौ प्रदान करो. हे अग्नि! हमें पुत्र एवं पौत्र प्राप्त हों तथा तुम्हारी फलदायक सुबुद्धि हमारे अनुकूल हो. (७)
O agni! Always give me the worshiper of the yajna as a means of many deeds. O agni! May we have sons and grandsons, and may your fruitful wisdom be compatible with us. (7)