हरि ॐ

ऋग्वेद (Rigved)

ऋग्वेद 3.23.2

मंडल 3 → सूक्त 23 → श्लोक 2 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

ऋग्वेद (मंडल 3)

ऋग्वेद: | सूक्त: 23
अम॑न्थिष्टां॒ भार॑ता रे॒वद॒ग्निं दे॒वश्र॑वा दे॒ववा॑तः सु॒दक्ष॑म् । अग्ने॒ वि प॑श्य बृह॒ताभि रा॒येषां नो॑ ने॒ता भ॑वता॒दनु॒ द्यून् ॥ (२)
हे अग्नि! भरत के पुत्रों-देवाश्रय एवं देववात ने शोभन सामर्थ्य तथा धनयुक्त तुम्हें अरणिमंथन द्वारा उत्पन्न किया था. हे अग्नि! पर्याप्त धन लेकर हमारी ओर देखो एवं प्रतिदिन हमारे अन्रों के लाने वाले बनो. (२)
O agni! Bharata's sons- Devashraya and Devvata- had created you with the power of adornment and wealth by Aranimanthan. O agni! Look at us with enough money and be the bringer of our inner being every day. (2)