हरि ॐ

ऋग्वेद (Rigved)

ऋग्वेद 3.23.4

मंडल 3 → सूक्त 23 → श्लोक 4 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

ऋग्वेद (मंडल 3)

ऋग्वेद: | सूक्त: 23
नि त्वा॑ दधे॒ वर॒ आ पृ॑थि॒व्या इळा॑यास्प॒दे सु॑दिन॒त्वे अह्ना॑म् । दृ॒षद्व॑त्यां॒ मानु॑ष आप॒यायां॒ सर॑स्वत्यां रे॒वद॑ग्ने दिदीहि ॥ (४)
हे अग्नि! उत्तम दिनों की प्राप्ति के लिए मैं तुम्हें गौ-रूप-धारिणी धरती के उत्तम स्थान में स्थापित करता हूं. हे धनसंपन्न अग्नि! तुम दृषद्वती, आपया एवं सरस्वती नदियों के मानव-सहित तटों पर जलो. (४)
O agni! In order to receive the best days, I set you up in the best place of the earth. O rich agni! You burn on the banks of the rivers Drishti, Apya and Saraswati, including the human beings. (4)