हरि ॐ

ऋग्वेद (Rigved)

ऋग्वेद 3.27.13

मंडल 3 → सूक्त 27 → श्लोक 13 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

ऋग्वेद (मंडल 3)

ऋग्वेद: | सूक्त: 27
ई॒ळेन्यो॑ नम॒स्य॑स्ति॒रस्तमां॑सि दर्श॒तः । सम॒ग्निरि॑ध्यते॒ वृषा॑ ॥ (१३)
पूजा तथा नमस्कार के योग्य, अंधकार का नाश करने के कारण सबके दर्शनीय एवं कामवर्षी अग्नि प्रज्वलित किए जाते हैं. (१३)
Worthy of worship and salutations, due to the destruction of darkness, the agni is ignited by all the visible and working years. (13)