हरि ॐ

ऋग्वेद (Rigved)

ऋग्वेद 3.27.2

मंडल 3 → सूक्त 27 → श्लोक 2 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

ऋग्वेद (मंडल 3)

ऋग्वेद: | सूक्त: 27
ईळे॑ अ॒ग्निं वि॑प॒श्चितं॑ गि॒रा य॒ज्ञस्य॒ साध॑नम् । श्रु॒ष्टी॒वानं॑ धि॒तावा॑नम् ॥ (२)
मैं स्तुतियों द्वारा मेधावी, यज्ञ संपन्न करने वाले एवं सुख तथा धन के स्वामी अग्नि की स्तुति करता हूं. (२)
I praise Agni, the bright, the one who performs the yagna and the lord of happiness and wealth, through praises. (2)