हरि ॐ

ऋग्वेद (Rigved)

ऋग्वेद 3.28.2

मंडल 3 → सूक्त 28 → श्लोक 2 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

ऋग्वेद (मंडल 3)

ऋग्वेद: | सूक्त: 28
पु॒रो॒ळा अ॑ग्ने पच॒तस्तुभ्यं॑ वा घा॒ परि॑ष्कृतः । तं जु॑षस्व यविष्ठ्य ॥ (२)
हे अतिशययुवा अग्नि! पुरोडाश तुम्हारे लिए पकाया एवं संस्कृत किया गया है. तुम उसका सेवन करो. (२)
O very young agni! Purodash has been cooked and Sanskrit for you. You consume it. (2)