ऋग्वेद (मंडल 3)
इन्द्र॒स्तुजो॑ ब॒र्हणा॒ आ वि॑वेश नृ॒वद्दधा॑नो॒ नर्या॑ पु॒रूणि॑ । अचे॑तय॒द्धिय॑ इ॒मा ज॑रि॒त्रे प्रेमं वर्ण॑मतिरच्छु॒क्रमा॑साम् ॥ (५)
इंद्र ने युद्ध करने वालों के पर्याप्त धनों को छीनते हुए बाधा पहुंचाने वाली तथा युद्ध की अभिलाषा से आगे बढ़ती हुई शत्रु सेनाओं में प्रवेश किया. इंद्र ने स्तुतिकर्ता के लिए उषाओं का ज्ञान कराया तथा उनके चमकीले रंग को बढ़ाया. (५)
Indra entered the enemy armies, taking away enough money from the warrs, obstructing and moving ahead of the desire for war. Indra made the ushas known to the eulogist and increased their bright color. (5)