हरि ॐ

ऋग्वेद (Rigved)

ऋग्वेद 3.35.4

मंडल 3 → सूक्त 35 → श्लोक 4 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

ऋग्वेद (मंडल 3)

ऋग्वेद: | सूक्त: 35
ब्रह्म॑णा ते ब्रह्म॒युजा॑ युनज्मि॒ हरी॒ सखा॑या सध॒माद॑ आ॒शू । स्थि॒रं रथं॑ सु॒खमि॑न्द्राधि॒तिष्ठ॑न्प्रजा॒नन्वि॒द्वाँ उप॑ याहि॒ सोम॑म् ॥ (४)
हे इंद्र! मंत्र द्वारा रथ में जोड़ने योग्य, युद्ध में समान रूप से प्रसिद्ध तुम्हारे दोनों घोड़ों को हम मंत्रोच्चारणपूर्वक रथ में जोड़ते हैं. तुम ज्ञानपूर्वक मजबूत एवं सुखदायक रथ पर चढ़कर सोम के समीप आओ. (४)
O Indra! We add both your horses, equally famous in battle, to the chariot with chanting mantras. You may come close to Soma by climbing a wisely strong and soothing chariot. (4)