हरि ॐ

ऋग्वेद (Rigved)

ऋग्वेद 3.35.6

मंडल 3 → सूक्त 35 → श्लोक 6 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

ऋग्वेद (मंडल 3)

ऋग्वेद: | सूक्त: 35
तवा॒यं सोम॒स्त्वमेह्य॒र्वाङ्छ॑श्वत्त॒मं सु॒मना॑ अ॒स्य पा॑हि । अ॒स्मिन्य॒ज्ञे ब॒र्हिष्या नि॒षद्या॑ दधि॒ष्वेमं ज॒ठर॒ इन्दु॑मिन्द्र ॥ (६)
यह सोम तुम्हारा है. तुम इसके सामने आओ एवं प्रसन्न मन से इस बहुत से सोम को पिओ. हे इंद्र! इस यज्ञ में बिछे हुए कुशों पर बैठकर इस सोम को पेट में डालो. (६)
This mon is yours. You come in front of it and drink this lot of mon with a happy heart. O Indra! Sit on the kushas that are laid in this yajna and put this som in the stomach. (6)