हरि ॐ

ऋग्वेद (Rigved)

ऋग्वेद 3.35.9

मंडल 3 → सूक्त 35 → श्लोक 9 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

ऋग्वेद (मंडल 3)

ऋग्वेद: | सूक्त: 35
याँ आभ॑जो म॒रुत॑ इन्द्र॒ सोमे॒ ये त्वामव॑र्ध॒न्नभ॑वन्ग॒णस्ते॑ । तेभि॑रे॒तं स॒जोषा॑ वावशा॒नो॒३॒॑ऽग्नेः पि॑ब जि॒ह्वया॒ सोम॑मिन्द्र ॥ (९)
हे इंद्र! सोमपान के समय तुम जिन मरुतों का आदर करते हो, युद्ध में जो मरुद्गण तुम्हें बढ़ाते एवं तुम्हारी सहायता करते हैं, उन्हीं मरुतों के साथ मिलकर सोमपान की अभिलाषा करने वाले तुम अग्निरूपी जीभ द्वारा सोम पिओ. (९)
O Indra! Drink soma with the fiery tongue of the maruts that you desire to worship somapan, together with the same maruts that you grow and help you in the war. (9)