हरि ॐ

ऋग्वेद (Rigved)

ऋग्वेद 3.37.1

मंडल 3 → सूक्त 37 → श्लोक 1 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

ऋग्वेद (मंडल 3)

ऋग्वेद: | सूक्त: 37
वार्त्र॑हत्याय॒ शव॑से पृतना॒षाह्या॑य च । इन्द्र॒ त्वा व॑र्तयामसि ॥ (१)
हे इंद्र! हम वृत्र को नष्ट करने वाला बल पाने तथा शत्रु सेना को हराने के लिए तुम्हे प्रेरित करते हैं. (१)
O Indra! We inspire you to find the force that destroys the circle and defeat the enemy army. (1)