हरि ॐ

ऋग्वेद (Rigved)

ऋग्वेद 3.37.11

मंडल 3 → सूक्त 37 → श्लोक 11 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

ऋग्वेद (मंडल 3)

ऋग्वेद: | सूक्त: 37
अ॒र्वा॒वतो॑ न॒ आ ग॒ह्यथो॑ शक्र परा॒वतः॑ । उ॒ लो॒को यस्ते॑ अद्रिव॒ इन्द्रे॒ह तत॒ आ ग॑हि ॥ (११)
हे शक्तिशाली इंद्र! समीप अथवा दूर के स्थान से हमारे सामने आओ. हे वज्रधारी इंद्र! तुम्हारा जो भी उत्तम लोक है, वहां से तुम इस यज्ञ में आओ. (११)
O mighty Indra! Come before us from a nearby or distant place. O thunderbolt Indra! Whatever is your best folk, from there you come to this yajna. (11)