हरि ॐ

ऋग्वेद (Rigved)

ऋग्वेद 3.38.7

मंडल 3 → सूक्त 38 → श्लोक 7 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

ऋग्वेद (मंडल 3)

ऋग्वेद: | सूक्त: 38
तदिन्न्व॑स्य वृष॒भस्य॑ धे॒नोरा नाम॑भिर्ममिरे॒ सक्म्यं॒ गोः । अ॒न्यद॑न्यदसु॒र्यं१॒॑ वसा॑ना॒ नि मा॒यिनो॑ ममिरे रू॒पम॑स्मिन् ॥ (७)
जो यजमान कामवर्षी इंद्र के निमित्त गौ नाम वाली धेनु से हव्य दूध दुहते हैं, वे स्वर्ग प्राप्त करके कवि बनते हैं. असुरों का नया बल धारण करके उन मायावियों ने अपना-अपना रूप इंद्र को अर्पित किया. (७)
Those who milk the havya milk from the dhenu with the name gau for the sake of the host kamvarshi Indra, they attain heaven and become poets. Holding the new force of the asuras, those Mayavis offered their form to Indra. (7)