ऋग्वेद (मंडल 3)
यस्ते॒ अनु॑ स्व॒धामस॑त्सु॒ते नि य॑च्छ त॒न्व॑म् । स त्वा॑ ममत्तु सो॒म्यम् ॥ (११)
हे इंद्र! हव्य अन्न के पश्चात् तुम्हारे लिए जो सोम निचोड़ा गया है, उस में अपने शरीर को डुबो दो. सोमपान के योग्य तुमको वह सोमरस प्रसन्न करे. (११)
O Indra! Dip your body in the som that has been squeezed for you after the havya grain. May that Somras please you worthy of sompan. (11)