हरि ॐ

ऋग्वेद (Rigved)

ऋग्वेद 3.51.7

मंडल 3 → सूक्त 51 → श्लोक 7 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

ऋग्वेद (मंडल 3)

ऋग्वेद: | सूक्त: 51
इन्द्र॑ मरुत्व इ॒ह पा॑हि॒ सोमं॒ यथा॑ शार्या॒ते अपि॑बः सु॒तस्य॑ । तव॒ प्रणी॑ती॒ तव॑ शूर॒ शर्म॒न्ना वि॑वासन्ति क॒वयः॑ सुय॒ज्ञाः ॥ (७)
हे मरुतों से युक्त इंद्र! तुमने राजा शार्यात के यज्ञ में जिस प्रकार सोमरस पिआ था, उसी प्रकार इस यज्ञ में भी पिओ. हे शूर! तुम्हारे बाधाहीन निवास में स्थित शोभन यज्ञ करने वाले बुद्धिमान्‌ तुम्हें हव्य देकर तुम्हारी सेवा करते हैं. (७)
O Indra with the maruts! Just as you drank someras in the yajna of King Shariat, drink in this yajna also. Oh, Shur! The wise men who perform shobhan yajna in your unhindered abode serve you by giving you a greeting. (7)