हरि ॐ

ऋग्वेद (Rigved)

ऋग्वेद 3.52.1

मंडल 3 → सूक्त 52 → श्लोक 1 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

ऋग्वेद (मंडल 3)

ऋग्वेद: | सूक्त: 52
धा॒नाव॑न्तं कर॒म्भिण॑मपू॒पव॑न्तमु॒क्थिन॑म् । इन्द्र॑ प्रा॒तर्जु॑षस्व नः ॥ (१)
हे इंद्र! भुने हुए जौ वाले, दही से मिले सत्तुओं से युक्ता, पुरोडाश सहित एवं उक्थ मंत्रों के उच्चारणपूर्वक प्रातःकाल के यज्ञ में दिए गए सोम का तुम सेवन करो. (१)
O Indra! You should consume the som given in the morning yajna with roasted barley, yukta with sattus from curd, including purodas and recitation of uqtha mantras. (1)