ऋग्वेद (मंडल 3)
आ म॑न्येथा॒मा ग॑तं॒ कच्चि॒देवै॒र्विश्वे॒ जना॑सो अ॒श्विना॑ हवन्ते । इ॒मा हि वां॒ गोऋ॑जीका॒ मधू॑नि॒ प्र मि॒त्रासो॒ न द॒दुरु॒स्रो अग्रे॑ ॥ (४)
हे अश्चिनीकुमारो! हमारी स्तुति को जानो और अश्वो द्वारा यज्ञ में पधारो. सभी स्तोता तुम्हें बुलाते हैं. वे मित्रों के समान तुम्हें दूध मिला हुआ एवं मादक सोमरस देते हैं. सूर्य उषा के आगे उदय होते हैं. (४)
O aschinikumaro! Know our praise and go to the yajna by the ashwa. All the stotas call you. They give you milk mixed and intoxicating somras like friends. The sun rises ahead of Usha. (4)