ऋग्वेद (मंडल 3)
इन्द्र॑ ऋ॒भुभि॒र्वाज॑वद्भिः॒ समु॑क्षितं सु॒तं सोम॒मा वृ॑षस्वा॒ गभ॑स्त्योः । धि॒येषि॒तो म॑घवन्दा॒शुषो॑ गृ॒हे सौ॑धन्व॒नेभिः॑ स॒ह म॑त्स्वा॒ नृभिः॑ ॥ (५)
हे इंद्र! तुम अन्न वाले ऋभु.ओं के साथ मिलकर जल द्वारा भली प्रकार गीले एवं पत्थरों द्वारा निचोड़े हुए सोम को दोनों हाथों से पकड़कर पिओ. हे मघवा! तुम स्तुति से प्रेरणा पाकर यजमान के घर में सुधन्वा के पुत्र ऋभु.ओं के साथ सोम पीकर प्रसन्न बनो. (५)
O Indra! You, together with the riches of food grains, drink the soma wet by water well and squeezed by stones with both hands. Oh, this maghwa! Be happy to drink the som with The Hribhu., the sons of Sudhanva, in the house of the host, inspired by praise. (5)