हरि ॐ

ऋग्वेद (Rigved)

ऋग्वेद 4.10.6

मंडल 4 → सूक्त 10 → श्लोक 6 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

ऋग्वेद (मंडल 4)

ऋग्वेद: | सूक्त: 10
घृ॒तं न पू॒तं त॒नूर॑रे॒पाः शुचि॒ हिर॑ण्यम् । तत्ते॑ रु॒क्मो न रो॑चत स्वधावः ॥ (६)
हे अन्न के स्वामी अग्नि! तुम्हारा शरीर शुद्ध घृत के समान पापरहित है. तुम्हारा शुद्ध एवं रमणीय तेज अलंकार के समान चमकता है. (६)
O agni, lord of the grain! Your body is sinless like pure disgust. Your pure and delightful sharp shines like a ornament. (6)