हरि ॐ

ऋग्वेद (Rigved)

ऋग्वेद 4.15.5

मंडल 4 → सूक्त 15 → श्लोक 5 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

ऋग्वेद (मंडल 4)

ऋग्वेद: | सूक्त: 15
अस्य॑ घा वी॒र ईव॑तो॒ऽग्नेरी॑शीत॒ मर्त्यः॑ । ति॒ग्मज॑म्भस्य मी॒ळ्हुषः॑ ॥ (५)
स्तुति करने में कुशल मनुष्य तीखे तेज वाले, अभिलषित फल देने वाले एवं गतिशील- अग्नि को वश में कर लें. (५)
May men skilled in praising be able to subdue the agni, those with sharp, fast, bearing the desired fruit and the dynamic. (5)