हरि ॐ

ऋग्वेद (Rigved)

ऋग्वेद 4.16.11

मंडल 4 → सूक्त 16 → श्लोक 11 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

ऋग्वेद (मंडल 4)

ऋग्वेद: | सूक्त: 16
यासि॒ कुत्से॑न स॒रथ॑मव॒स्युस्तो॒दो वात॑स्य॒ हर्यो॒रीशा॑नः । ऋ॒ज्रा वाजं॒ न गध्यं॒ युयू॑षन्क॒विर्यदह॒न्पार्या॑य॒ भूषा॑त् ॥ (११)
हे इंद्र! बुद्धिमान्‌ कुत्स ग्रहण करने योग्य अन्न के समान सरलगति घोड़ों को अपने रथ में जोड़कर जिस दिन आपत्तियों से पार हुआ, हे शन्रुनाशक एवं वायु सदृश वेगशाली अश्चों के स्वामी इंद्र! उस दिन तुम कुत्स की रक्षा की इच्छा करते हुए उसके साथ एक रथ में गए थे. (११)
O Indra! The day he overcame the objections by adding simple steps horses to his chariot like the food that the wise dogs receive, O Indra, the lord of the shiny and air-like fast ashchas! That day you went in a chariot with Kuts, wishing to protect him. (11)