हरि ॐ

ऋग्वेद (Rigved)

ऋग्वेद (मंडल 4)

ऋग्वेद: | सूक्त: 18
अ॒यं पन्था॒ अनु॑वित्तः पुरा॒णो यतो॑ दे॒वा उ॒दजा॑यन्त॒ विश्वे॑ । अत॑श्चि॒दा ज॑निषीष्ट॒ प्रवृ॑द्धो॒ मा मा॒तर॑ममु॒या पत्त॑वे कः ॥ (१)
इंद्र बोले-“योनि से जन्म लेने का मार्ग परंपरागत एवं सनातन है. समस्त देव एवं मनुष्य उसी मार्ग से निकले हैं. गर्भ में वृद्धि प्राप्त करने वाले तुम भी इसी मार्ग से जन्म लो. दूसरा मार्ग अपना कर माता की मृत्यु का काम मत करो.” (१)
Indra said, "The path to being born vaginally is traditional and eternal. All devas and human beings have gone out of that path. Those who get growth in the womb, you also get birth by this path. Don't take the other path and don't make your mother suffer." (1)

ऋग्वेद (मंडल 4)

ऋग्वेद: | सूक्त: 18
नाहमतो॒ निर॑या दु॒र्गहै॒तत्ति॑र॒श्चता॑ पा॒र्श्वान्निर्ग॑माणि । ब॒हूनि॑ मे॒ अकृ॑ता॒ कर्त्वा॑नि॒ युध्यै॑ त्वेन॒ सं त्वे॑न पृच्छै ॥ (२)
वामदेव ने कहा-“हम इस दुर्गम योनि-मार्ग से जन्म नहीं लेंगे. हम तिरछे होकर बगल से निकलेंगे. हमें बहुत से बिना किए हुए काम करने हैं-किसी के साथ युद्ध एवं किसी के साथ वादविवाद.” (२)
Vamdev said, "We will not be born through this inaccessible vagina. We'll get out of the side diagonally. We have a lot of things to do without doing it – war with someone and a debate with someone." (2)

ऋग्वेद (मंडल 4)

ऋग्वेद: | सूक्त: 18
प॒रा॒य॒तीं मा॒तर॒मन्व॑चष्ट॒ न नानु॑ गा॒न्यनु॒ नू ग॑मानि । त्वष्टु॑र्गृ॒हे अ॑पिब॒त्सोम॒मिन्द्रः॑ शतध॒न्यं॑ च॒म्वोः॑ सु॒तस्य॑ ॥ (३)
इंद्र बोले-“यदि हम पुरातन योनि-मार्ग से नहीं निकलेंगे तो हमारी माता मर जाएगी. इस प्रकार हम शीघ्र बाहर निकलेंगे. वामदेव कहने लगे-“इंद्र ने त्वष्टा के घर में पत्थरों द्वारा निचोड़े गए एवं सैकड़ों रत्नों के मूल्य वाले सोमरस को पिया.” (३)
Indra said, "If we do not go out of the vagina, which is the tradition, our mother will die." That's how we'll get out soon. Vamdev began to say, "Indra drank the somras in the house of Tvashta, which was squeezed by stones and worth hundreds of ratnas." (3)

ऋग्वेद (मंडल 4)

ऋग्वेद: | सूक्त: 18
किं स ऋध॑क्कृणव॒द्यं स॒हस्रं॑ मा॒सो ज॒भार॑ श॒रद॑श्च पू॒र्वीः । न॒ही न्व॑स्य प्रति॒मान॒मस्त्य॒न्तर्जा॒तेषू॒त ये जनि॑त्वाः ॥ (४)
“अदिति इंद्र को सैकड़ों मासों और वर्षों तक गर्भ में रखे रही. इंद्र ने यह नियम के प्रतिकूल कार्य क्यों किया?” इसे सुनकर अदिति ने उत्तर दिया-“हे वामदेव! जो लोग उत्पन्न हो चुके हैं अथवा भविष्य में होंगे, उन में से किसी के भी साथ इंद्र की समानता नहीं हो सकती.” (४)
"Aditi kept Indra in the womb for hundreds of months and years. Why did Indra do this contrary to the rule?" On hearing this, Aditi replied, "O Vamdev! Indra cannot have the sameness with any of those who have been born or will be born in the future." (4)

ऋग्वेद (मंडल 4)

ऋग्वेद: | सूक्त: 18
अ॒व॒द्यमि॑व॒ मन्य॑माना॒ गुहा॑क॒रिन्द्रं॑ मा॒ता वी॒र्ये॑णा॒ न्यृ॑ष्टम् । अथोद॑स्थात्स्व॒यमत्कं॒ वसा॑न॒ आ रोद॑सी अपृणा॒ज्जाय॑मानः ॥ (५)
अंधेरे सूतिका घर में पैदा होने वाले इंद्र को निंदा के योग्य समझकर माता अदिति ने परम शक्तिशाली बना दिया. इंद्र अपने तेज को धारण करके उठ खड़े हुए और जन्म लेते ही उन्होंने धरती-आकाश को घेर लिया. (५)
Mother Aditi made Indra ultimate powerful by considering Indra, who was born in the dark sutika house, to save Indra from condemnation. Indra stood up holding his brightness and as soon as he was born, he surrounded the earth and sky. (5)

ऋग्वेद (मंडल 4)

ऋग्वेद: | सूक्त: 18
ए॒ता अ॑र्षन्त्यलला॒भव॑न्तीरृ॒ताव॑रीरिव सं॒क्रोश॑मानाः । ए॒ता वि पृ॑च्छ॒ किमि॒दं भ॑नन्ति॒ कमापो॒ अद्रिं॑ परि॒धिं रु॑जन्ति ॥ (६)
पानी से भरी हुई नदियां इस प्रकार गर्जन करती हुई बह रही हैं, जैसे इंद्र की महत्ता का घोष कर रही हैं. उनसे पूछो कि ये क्या कहती हैं? इंद्र ने जल को रोकने वाले मेघ को भेदा था. क्या वे नदियां उसी का वर्णन कर रही हैं? (६)
The rivers filled with water are flowing roaring like they are proclaiming the importance of Indra. Ask them what they say? Indra had pierced the cloud that stopped the water. Are those rivers describing the same? (6)

ऋग्वेद (मंडल 4)

ऋग्वेद: | सूक्त: 18
किमु॑ ष्विदस्मै नि॒विदो॑ भन॒न्तेन्द्र॑स्याव॒द्यं दि॑धिषन्त॒ आपः॑ । ममै॒तान्पु॒त्रो म॑ह॒ता व॒धेन॑ वृ॒त्रं ज॑घ॒न्वाँ अ॑सृज॒द्वि सिन्धू॑न् ॥ (७)
इंद्र को जो ब्रह्महत्या का पाप लगा है, उस संबंध में विद्वानों का क्या कहना है? यह पाप जल में फेन रूप से उपस्थित है. मेरे पुत्र इंद्र ने बलपूर्वक वज्र चलाकर वृत्र को मारा. इसके बाद नदियों को बहाया. (७)
What do the scholars have to say about the sin of killing Indra? It is present in sinful water. My son Indra forcefully wielded a thunderbolt and killed Vritra. After that the rivers flowed. (7)

ऋग्वेद (मंडल 4)

ऋग्वेद: | सूक्त: 18
मम॑च्च॒न त्वा॑ युव॒तिः प॒रास॒ मम॑च्च॒न त्वा॑ कु॒षवा॑ ज॒गार॑ । मम॑च्चि॒दापः॒ शिश॑वे ममृड्यु॒र्मम॑च्चि॒दिन्द्रः॒ सह॒सोद॑तिष्ठत् ॥ (८)
वामदेव कहने लगे-“हे इंद्र! मतवाली युवती माता अदिति ने तुम्हें जन्म दिया. इसी समय कुषवा नाम की राक्षसी ने मतवाली बनकर तुम्हें निगल लिया. जलों से मस्त होकर तुम्हें सुख पहुंचाया. इंद्र प्रसन्न होकर सूतिकागृह में ही उस राक्षसी को मारने लगे.” (८)
Vamdev said, "O Indra! Mother Aditi gave birth to you. At the same time, a demon named Kushwaa became a matwali and swallowed you up. The water brought you happiness by being engrossed. Indra was pleased to kill the demon in the sutikagriha itself." (8)
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