हरि ॐ

ऋग्वेद (Rigved)

ऋग्वेद 4.20.7

मंडल 4 → सूक्त 20 → श्लोक 7 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

ऋग्वेद (मंडल 4)

ऋग्वेद: | सूक्त: 20
न यस्य॑ व॒र्ता ज॒नुषा॒ न्वस्ति॒ न राध॑स आमरी॒ता म॒घस्य॑ । उ॒द्वा॒वृ॒षा॒णस्त॑विषीव उग्रा॒स्मभ्यं॑ दद्धि पुरुहूत रा॒यः ॥ (७)
हे इंद्र! जब से तुम उत्पन्न हुए हो, तभी से न तो कोई तुम्हें रोकने वाला है और न तुम्हारे द्वारा यज्ञों के निमित्त दिए हुए धन को कोई नष्ट कर सकता है. हे कामवर्षी, शक्तिशाली, तेजस्वी एवं बहुत से यजमानो द्वारा बुलाए गए इंद्र! हमें धन दो. (७)
O Indra! Since you were born, no one is going to stop you, nor can anyone destroy the money you have given for the sacrifices. O kamavarshi, mighty, mighty and brilliant and called by many hosts Indra! Give us money. (7)