हरि ॐ

ऋग्वेद (Rigved)

ऋग्वेद 4.23.2

मंडल 4 → सूक्त 23 → श्लोक 2 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

ऋग्वेद (मंडल 4)

ऋग्वेद: | सूक्त: 23
को अ॑स्य वी॒रः स॑ध॒माद॑माप॒ समा॑नंश सुम॒तिभिः॒ को अ॑स्य । कद॑स्य चि॒त्रं चि॑किते॒ कदू॒ती वृ॒धे भु॑वच्छशमा॒नस्य॒ यज्योः॑ ॥ (२)
कौन वीर व्यक्ति इंद्र के साथ संग्राम में जाता है एवं कौन इंद्र की कृपादृष्टि प्राप्त करता है? पता नहीं इंद्र का विचित्र धन कब वितरित होगा? इंद्र स्तुति करते हुए यजमान की वृद्धि और रक्षा के लिए कब प्रवृत्त होंगे? (२)
Which heroic person goes into the struggle with Indra and who receives indra's grace? Don't know when Indra's strange wealth will be distributed? When will Indra tend to increase and protect the host while praising him? (2)