हरि ॐ

ऋग्वेद (Rigved)

ऋग्वेद 4.31.10

मंडल 4 → सूक्त 31 → श्लोक 10 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

ऋग्वेद (मंडल 4)

ऋग्वेद: | सूक्त: 31
अ॒स्माँ अ॑वन्तु ते श॒तम॒स्मान्स॒हस्र॑मू॒तयः॑ । अ॒स्मान्विश्वा॑ अ॒भिष्ट॑यः ॥ (१०)
हे इंद्र! तुम्हारे सैकड़ों-हजारों रक्षासाधन हमारी रक्षा करें. तुम्हारे सभी प्रयास हमारी रक्षा करें. (१०)
O Indra! Let your hundreds and thousands of defenses protect us. Let all your efforts protect us. (10)