हरि ॐ

ऋग्वेद (Rigved)

ऋग्वेद 4.32.1

मंडल 4 → सूक्त 32 → श्लोक 1 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

ऋग्वेद (मंडल 4)

ऋग्वेद: | सूक्त: 32
आ तू न॑ इन्द्र वृत्रहन्न॒स्माक॑म॒र्धमा ग॑हि । म॒हान्म॒हीभि॑रू॒तिभिः॑ ॥ (१)
हे शत्रुहंता एवं महान्‌ इंद्र! तुम अपने महान्‌ रक्षासाधनों को लेकर शीघ्र ही हम लोगों के समीप आओ. (१)
O enemy and great Indra! Come to us soon with your great defense. (1)