हरि ॐ

ऋग्वेद (Rigved)

ऋग्वेद 4.34.11

मंडल 4 → सूक्त 34 → श्लोक 11 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

ऋग्वेद (मंडल 4)

ऋग्वेद: | सूक्त: 34
नापा॑भूत॒ न वो॑ऽतीतृषा॒मानिः॑शस्ता ऋभवो य॒ज्ञे अ॒स्मिन् । समिन्द्रे॑ण॒ मद॑थ॒ सं म॒रुद्भिः॒ सं राज॑भी रत्न॒धेया॑य देवाः ॥ (११)
हे ऋभुओ! तुम यहां से चले मत जाना. हम तुम्हें अधिक प्यासा नहीं रखेंगे. हे देवरूप ऋभुओ! तुम अनिंदित रूप में धन देने के लिए इंद्र, मरुद्गण एवं दीप्तिशाली देवों के साथ प्रसन्न बनो. (११)
Hey, Lord! Don't you go away from here. We won't keep you thirsty more. O God, Rich! Be pleased with Indra, the Deserts and the radiant gods to give money in the unadorned form. (11)