ऋग्वेद (मंडल 4)
वि॒दा॒नासो॒ जन्म॑नो वाजरत्ना उ॒त ऋ॒तुभि॑रृभवो मादयध्वम् । सं वो॒ मदा॒ अग्म॑त॒ सं पुरं॑धिः सु॒वीरा॑म॒स्मे र॒यिमेर॑यध्वम् ॥ (२)
हे सोमरूपी अन्न से सुशोभित ऋभुओ! तुम देवश्रेणी में अपना जन्म जानकर देवों के साथ आनंदित बनो. सोमपान से उत्पन्न मद एवं स्तुति तुम्हें प्राप्त हुई है. तुम हमें पुत्र एवं पौत्रों से युक्त धन दो. (२)
O somaroopi beautify with food! Be happy with the gods knowing your birth in the devasrangi. You have received the item and praise generated from Sompan. Give us money with sons and grandsons. (2)