हरि ॐ

ऋग्वेद (Rigved)

ऋग्वेद 4.34.5

मंडल 4 → सूक्त 34 → श्लोक 5 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

ऋग्वेद (मंडल 4)

ऋग्वेद: | सूक्त: 34
आ वा॑जा या॒तोप॑ न ऋभुक्षा म॒हो न॑रो॒ द्रवि॑णसो गृणा॒नाः । आ वः॑ पी॒तयो॑ऽभिपि॒त्वे अह्ना॑मि॒मा अस्तं॑ नव॒स्व॑ इव ग्मन् ॥ (५)
हे नेतारूप वाजगण एवं ऋभुगण! तुम लोग महान्‌ धन की स्तुति करते हुए हमारे समीप आओ. दिन के अंत अर्थात्‌ तीसरे सवन के समय पानयोग्य सोमरस उसी प्रकार तुम्हारे निकट आता है, जिस प्रकार बछड़ों वाली गाएं अपने घर की ओर आती हैं. (५)
O leader vajgan and ribhugan! Come to us praising the great riches. At the end of the day i.e. the third evening, the panable somras comes close to you in the same way that the cows with calves come towards their house. (5)