हरि ॐ

ऋग्वेद (Rigved)

ऋग्वेद 4.35.3

मंडल 4 → सूक्त 35 → श्लोक 3 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

ऋग्वेद (मंडल 4)

ऋग्वेद: | सूक्त: 35
व्य॑कृणोत चम॒सं च॑तु॒र्धा सखे॒ वि शि॒क्षेत्य॑ब्रवीत । अथै॑त वाजा अ॒मृत॑स्य॒ पन्थां॑ ग॒णं दे॒वाना॑मृभवः सुहस्ताः ॥ (३)
हे ऋभुओ! तुमने चमस के चार टुकड़े करके कहा था-“हे मित्र अग्नि! कृपा करो.” अग्नि ने उत्तर दिया-“हे वाजगण एवं ऋभुओ! तुम कुशल लोग स्वर्ग के मार्ग से जाओ.” (३)
Hey, Lord! You cut four spoons into four pieces and said, "O friend, agni! Please," replied the agni, "O Vajgan and Rishoo! You skilled people go out of the way of heaven." (3)