ऋग्वेद (मंडल 4)
ऋ॒भु॒तो र॒यिः प्र॑थ॒मश्र॑वस्तमो॒ वाज॑श्रुतासो॒ यमजी॑जन॒न्नरः॑ । वि॒भ्व॒त॒ष्टो वि॒दथे॑षु प्र॒वाच्यो॒ यं दे॑वा॒सोऽव॑था॒ स विच॑र्षणिः ॥ (५)
वह प्रमुख एवं अन्नयुक्त धन ऋभुओं के पास से हमारे पास आवे, जिसे प्रसिद्ध नेता ऋभुओं ने वाजगण के साथ मिलकर उत्पन्न किया था. विभुओं द्वारा अश्विनीकुमारों के लिए बनाया रथ यज्ञ में विशेष प्रशंसनीय है. हे देवो! तुम जिसकी रक्षा करते हो, वह विशेष रूप से प्रशंसनीय बन जाता है. (५)
Let us have the principal and food-rich wealth that the riches that the famous leader, The Sages, along with Vajgana, should come to us. The chariot made by the Vibhus for the Ashwinikumaras is particularly praiseworthy in the yajna. Oh, God! What you protect becomes especially admirable. (5)