ऋग्वेद (मंडल 4)
द॒धि॒क्राव्णो॑ अकारिषं जि॒ष्णोरश्व॑स्य वा॒जिनः॑ । सु॒र॒भि नो॒ मुखा॑ कर॒त्प्र ण॒ आयूं॑षि तारिषत् ॥ (६)
हम जयशील, व्यापक एवं वेगशाली दधिक्रा देव की स्तुति करते हैं. वे हमारी चक्षु आदि इंद्रियों को आनंदित एवं हमारी आयु को अधिक करें. (६)
We praise the joyful, comprehensive and fast-paced Dadidra Dev. They make our eyeglasses, etc., senses happy and make us more old. (6)