हरि ॐ

ऋग्वेद (Rigved)

ऋग्वेद 4.41.11

मंडल 4 → सूक्त 41 → श्लोक 11 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

ऋग्वेद (मंडल 4)

ऋग्वेद: | सूक्त: 41
आ नो॑ बृहन्ता बृह॒तीभि॑रू॒ती इन्द्र॑ या॒तं व॑रुण॒ वाज॑सातौ । यद्दि॒द्यवः॒ पृत॑नासु प्र॒क्रीळा॒न्तस्य॑ वां स्याम सनि॒तार॑ आ॒जेः ॥ (११)
हे महान्‌ इंद्र एवं वरुण! तुम दोनों विशाल रक्षा साधनों के साथ आओ. अन्न प्राप्ति के हेतु होने वाले जिस युद्ध में शत्रुओं के आयुध चमकते हैं, हम उस युद्ध में तुम्हारी कृपा से विजयी हों. (११)
O great Indra and Varuna! You both come up with huge defense tools. Let us win by your grace in the battle in which the arms of the enemies shine for the sake of food. (11)