ऋग्वेद (मंडल 4)
वि॒दुष्टे॒ विश्वा॒ भुव॑नानि॒ तस्य॒ ता प्र ब्र॑वीषि॒ वरु॑णाय वेधः । त्वं वृ॒त्राणि॑ शृण्विषे जघ॒न्वान्त्वं वृ॒ताँ अ॑रिणा इन्द्र॒ सिन्धू॑न् ॥ (७)
हे वरुण! तुम्हारे कामों को सारा संसार जानता है. हे स्तोता! वरुण के निमित्त स्तुति बोलो. हे इंद्र! ऐसा सुना जाता है कि तुमने बैरियों का वध किया था. तुमने ढकी हुई नदियों को प्रवाहित किया था. (७)
Hey Varun! The whole world knows your deeds. This is the hymn! Speak praise for Varuna. O Indra! It is heard that you killed the barries. You had flown the covered rivers. (7)