हरि ॐ

ऋग्वेद (Rigved)

ऋग्वेद 4.47.1

मंडल 4 → सूक्त 47 → श्लोक 1 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

ऋग्वेद (मंडल 4)

ऋग्वेद: | सूक्त: 47
वायो॑ शु॒क्रो अ॑यामि ते॒ मध्वो॒ अग्रं॒ दिवि॑ष्टिषु । आ या॑हि॒ सोम॑पीतये स्पा॒र्हो दे॑व नि॒युत्व॑ता ॥ (१)
हे वायु! मैं व्रतचर्यादि द्वारा पवित्र होकर सबसे पहले तुम्हारे निमित्त मधुर सोमरस लाता हूं, क्योंकि मैं स्वर्ग में जाना चाहता हूं. हे अभिषवणीय देव! तुम अपने अश्चों द्वारा सोमपान के लिए यहां आओ. (१)
O air! I am the first to bring you sweet somras, sanctified by vratcharyadi, because I want to go to heaven. O god of worship! You come here to Sompan by your aschas. (1)