हरि ॐ

ऋग्वेद (Rigved)

ऋग्वेद 4.47.3

मंडल 4 → सूक्त 47 → श्लोक 3 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

ऋग्वेद (मंडल 4)

ऋग्वेद: | सूक्त: 47
वाय॒विन्द्र॑श्च शु॒ष्मिणा॑ स॒रथं॑ शवसस्पती । नि॒युत्व॑न्ता न ऊ॒तय॒ आ या॑तं॒ सोम॑पीतये ॥ (३)
हे वायु! तुम और इंद्र बल के स्वामी हो एवं घोड़ों से युक्त एक ही रथ पर चढ़ते हो. हम लोगों की रक्षा एवं सोमपान करने के लिए यहां आओ. (३)
O air! You and Indra are the masters of force and climb on the same chariot with horses. We come here to protect the people and do sompan. (3)