हरि ॐ

ऋग्वेद (Rigved)

ऋग्वेद 4.55.10

मंडल 4 → सूक्त 55 → श्लोक 10 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

ऋग्वेद (मंडल 4)

ऋग्वेद: | सूक्त: 55
तत्सु नः॑ सवि॒ता भगो॒ वरु॑णो मि॒त्रो अ॑र्य॒मा । इन्द्रो॑ नो॒ राध॒सा ग॑मत् ॥ (१०)
सविता, भग, वरुण, मित्र, अर्यमा एवं इंद्र जिस धन के साथ आते हैं, वह धन वे सब हमें दें. (१०)
Savita, Bhaga, Varuna, Friends, Aryama and Indra, the money they all come with, they all give us. (10)