हरि ॐ

ऋग्वेद (Rigved)

ऋग्वेद 4.55.8

मंडल 4 → सूक्त 55 → श्लोक 8 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

ऋग्वेद (मंडल 4)

ऋग्वेद: | सूक्त: 55
अ॒ग्निरी॑शे वस॒व्य॑स्या॒ग्निर्म॒हः सौभ॑गस्य । तान्य॒स्मभ्यं॑ रासते ॥ (८)
अग्नि धन एवं महान्‌ सौभाग्य के स्वामी हैं. वे हमें धन एवं सौभाग्य प्रदान करें. (८)
Fire is the master of wealth and great good fortune. They give us wealth and good fortune. (8)