हरि ॐ

ऋग्वेद (Rigved)

ऋग्वेद 4.8.6

मंडल 4 → सूक्त 8 → श्लोक 6 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

ऋग्वेद (मंडल 4)

ऋग्वेद: | सूक्त: 8
ते रा॒या ते सु॒वीर्यैः॑ सस॒वांसो॒ वि श‍ृ॑ण्विरे । ये अ॒ग्ना द॑धि॒रे दुवः॑ ॥ (६)
जो यजमान अग्नि की सेवा करते हैं, वे अग्नि की सेवा से धन पाकर एवं प्रसिद्ध पुत्र- पौत्रादि द्वारा प्रसिद्ध बनते हैं. (६)
The hosts who serve the agni become famous by receiving money from the service of agni and by the famous son- grandson. (6)