हरि ॐ

ऋग्वेद (Rigved)

ऋग्वेद 4.9.2

मंडल 4 → सूक्त 9 → श्लोक 2 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

ऋग्वेद (मंडल 4)

ऋग्वेद: | सूक्त: 9
स मानु॑षीषु दू॒ळभो॑ वि॒क्षु प्रा॒वीरम॑र्त्यः । दू॒तो विश्वे॑षां भुवत् ॥ (२)
राक्षसों आदि द्वारा अहिंसित, मानव प्रजाओं में भली प्रकार गमन करने वाले एवं मरणरहित अग्नि सब देवों के दूत बनें. (२)
The non-violent by demons, etc., and the agni that moves well in human beings and without death, become messengers of all gods. (2)