हरि ॐ

ऋग्वेद (Rigved)

ऋग्वेद 5.22.2

मंडल 5 → सूक्त 22 → श्लोक 2 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

ऋग्वेद (मंडल 5)

ऋग्वेद: | सूक्त: 22
न्य१॒॑ग्निं जा॒तवे॑दसं॒ दधा॑ता दे॒वमृ॒त्विज॑म् । प्र य॒ज्ञ ए॑त्वानु॒षग॒द्या दे॒वव्य॑चस्तमः ॥ (२)
हे यजमानो! तुम जातवेद, ह्युतिमान एवं ऋतु अनुसार यज्ञ करने वाले अग्नि को धारण करो. देवों को अतिशय प्रिय व यज्ञ-साधन के रूप में हमारे द्वारा दिया गया हवि आज अग्नि को प्राप्त हो. (२)
O hosts! You should wear the agni that performs yajna according to the jataveda, the hutiman and the season. May the gods be very dear and blessed by us as a means of sacrifice to the agni today. (2)