हरि ॐ

ऋग्वेद (Rigved)

ऋग्वेद 5.26.4

मंडल 5 → सूक्त 26 → श्लोक 4 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

ऋग्वेद (मंडल 5)

ऋग्वेद: | सूक्त: 26
अग्ने॒ विश्वे॑भि॒रा ग॑हि दे॒वेभि॑र्ह॒व्यदा॑तये । होता॑रं त्वा वृणीमहे ॥ (४)
हे अग्नि! तुम सब देवों के साथ हव्य देने वाले यजमान के यज्ञ में आओ. इसीलिए हम देवों को बुलाने वाले तुमसे प्रार्थना करते हैं. (४)
O agni! All of you come to the yagna of the host who gives the havya with the gods. That is why we pray to those who call the gods. (4)