ऋग्वेद (मंडल 5)
उ॒शना॒ यत्स॑ह॒स्यै॒३॒॑रया॑तं गृ॒हमि॑न्द्र जूजुवा॒नेभि॒रश्वैः॑ । व॒न्वा॒नो अत्र॑ स॒रथं॑ ययाथ॒ कुत्से॑न दे॒वैरव॑नोर्ह॒ शुष्ण॑म् ॥ (९)
हे इंद्र! जब तुम और उशना कवि सबको पराजित करने वाले एवं शीघ्र चलने वाले घोड़ों के द्वारा कुत्स ऋषि के घर गए थे, उस समय तुम शत्रुओं की हिंसा करते हुए समस्त देवों एवं कुत्स के साथ एक रथ पर बैठकर चले थे. तुमने शुष्ण असुर को मारा था. (९)
O Indra! When you and the Ushana poet went to the house of sage Kutsa by horsemen who defeated all of them and walked quickly, you sat on a chariot with all the gods and dogs, doing violence to the enemies. You killed the shushna asura. (9)