हरि ॐ

ऋग्वेद (Rigved)

ऋग्वेद 5.3.2

मंडल 5 → सूक्त 3 → श्लोक 2 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

ऋग्वेद (मंडल 5)

ऋग्वेद: | सूक्त: 3
त्वम॑र्य॒मा भ॑वसि॒ यत्क॒नीनां॒ नाम॑ स्वधाव॒न्गुह्यं॑ बिभर्षि । अ॒ञ्जन्ति॑ मि॒त्रं सुधि॑तं॒ न गोभि॒र्यद्दम्प॑ती॒ सम॑नसा कृ॒णोषि॑ ॥ (२)
हे अग्नि! तुम कन्याओं के लिए अर्यमा (नियमन करने वाले) बनते हो. हे स्वधावान्‌ अग्नि! तुम ही गोपनीय नाम 'वैश्वानर' धारण करते हो. जब तुम पति-पत्नी को एक मन वाला बना देते हो, तब वे तुम्हें मित्र मानकर गाय के दूध-घी से सींचते हैं. (२)
O agni! You become aryama (regulating) for girls. O agni! You wear the secret name 'Vaishvanar'. When you make a husband and wife with one mind, then they consider you as friends and water it with cow's milk and ghee. (2)