हरि ॐ

ऋग्वेद (Rigved)

ऋग्वेद 5.3.7

मंडल 5 → सूक्त 3 → श्लोक 7 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

ऋग्वेद (मंडल 5)

ऋग्वेद: | सूक्त: 3
यो न॒ आगो॑ अ॒भ्येनो॒ भरा॒त्यधीद॒घम॒घशं॑से दधात । ज॒ही चि॑कित्वो अ॒भिश॑स्तिमे॒तामग्ने॒ यो नो॑ म॒र्चय॑ति द्व॒येन॑ ॥ (७)
जो व्यक्ति हमारे प्रति पाप या अपराध करता है, अग्नि उस पापी व्यक्ति के प्रति बुरा व्यवहार करें. हे जानकार अग्नि! जो पाप या अपराध द्वारा हमारे काम में बाधा डालता है, उसी पापी को नष्ट करो. (७)
The person who commits sin or sin against us, let the agni behave badly towards that sinner. O knowledgeable agni! Who obstructs our work by sin or guilt, destroy the same sinner. (7)