हरि ॐ

ऋग्वेद (Rigved)

ऋग्वेद 5.35.3

मंडल 5 → सूक्त 35 → श्लोक 3 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

ऋग्वेद (मंडल 5)

ऋग्वेद: | सूक्त: 35
आ तेऽवो॒ वरे॑ण्यं॒ वृष॑न्तमस्य हूमहे । वृष॑जूति॒र्हि ज॑ज्ञि॒ष आ॒भूभि॑रिन्द्र तु॒र्वणिः॑ ॥ (३)
हे कामपूरकों में श्रेष्ठ, वर्षा करने वाले एवं शत्रुओं को शीघ्र मारने वाले इंद्र! तुम्हारा रक्षाकार्य उत्तम है. हम उसे पुकारते हैं. तुम सर्वव्यापक मरुतों के साथ हमारी रक्षा करो. (३)
O Indra, the best of the workmen, the one who rains and kills enemies quickly! Your defense work is excellent. We call him. You protect us with ubiquitous maruts. (3)