ऋग्वेद (मंडल 5)
स आ ग॑म॒दिन्द्रो॒ यो वसू॑नां॒ चिके॑त॒द्दातुं॒ दाम॑नो रयी॒णाम् । ध॒न्व॒च॒रो न वंस॑गस्तृषा॒णश्च॑कमा॒नः पि॑बतु दु॒ग्धमं॒शुम् ॥ (१)
इंद्र हमारे यज्ञ में आवें. जो इंद्र धनों को जानते हैं, वे कैसे हैं? वे धन देने वाले हैं. धनुर्धारी के समान उत्तम गति वाले एवं अत्यंत प्यासे इंद्र दुग्धमिश्रित सोम पिएं. (१)
Let Indra come into our yajna. Those who know indra dhanas, how are they? They're going to give money. Drink the best-speed and extremely thirsty Indra Dudhmishrita Som like a archer. (1)
ऋग्वेद (मंडल 5)
आ ते॒ हनू॑ हरिवः शूर॒ शिप्रे॒ रुह॒त्सोमो॒ न पर्व॑तस्य पृ॒ष्ठे । अनु॑ त्वा राज॒न्नर्व॑तो॒ न हि॒न्वन्गी॒र्भिर्म॑देम पुरुहूत॒ विश्वे॑ ॥ (२)
हे हरि नामक अश्चों के स्वामी एवं शूर इंद्र! हमारे द्वारा दिया हुआ सोम पर्वत के समान ऊंची तुम्हारी ठोढ़ी तक चट़े. हे दीप्तिशाली एवं बहुतों द्वारा बुलाए गए इंद्र! घोड़े जिस प्रकार घास से तृप्त होते हैं, उसी प्रकार हम अपनी स्तुतियों द्वारा तुम्हें संतुष्ट करेंगे. (२)
O Lord of the asshs named Hari and the brave Indra! Let the height of the Mon given by us as high as mount Som up to your chin. O Indra, who is glorious and called by many! Just as horses are filled with grass, so we will satisfy you by our praises. (2)
ऋग्वेद (मंडल 5)
च॒क्रं न वृ॒त्तं पु॑रुहूत वेपते॒ मनो॑ भि॒या मे॒ अम॑ते॒रिद॑द्रिवः । रथा॒दधि॑ त्वा जरि॒ता स॑दावृध कु॒विन्नु स्तो॑षन्मघवन्पुरू॒वसुः॑ ॥ (३)
हे बहुतों द्वारा बुलाए गए एवं वज्रधारी इंद्र! दरिद्रता से मेरा मन धरती पर चलने वाले पहिए के समान कांपता है. हे सदा बढ़ने वाले एवं धनस्वामी इंद्र! पुरावसु नामक ऋषि तुम्हें रथ पर बैठा जानकर तुम्हारी स्तुति अधिकता से करते हैं. (३)
O Indra, who has been called by many and is called by the thunderbolt! My mind trembles like a wheel on earth. O ever-growing and wealthy Indra! The sage named Puravasu praises you abundantly knowing you to be sitting on the chariot. (3)
ऋग्वेद (मंडल 5)
ए॒ष ग्रावे॑व जरि॒ता त॑ इ॒न्द्रेय॑र्ति॒ वाचं॑ बृ॒हदा॑शुषा॒णः । प्र स॒व्येन॑ मघव॒न्यंसि॑ रा॒यः प्र द॑क्षि॒णिद्ध॑रिवो॒ मा वि वे॑नः ॥ (४)
हे इंद्र! अधिक फल को शीघ्र भोगने के इच्छुक स्तोता लोग तुम्हारी उसी प्रकार स्तुति करते हैं, जिस प्रकार सोम कूटने वाले पत्थर की करते हैं. हे धन के स्वामी एवं हरि नामक घोड़ों वाले इंद्र! तुम दाएं और बाएं दोनों हाथों से धन बांटते हो. तुम हमें विफल मनोरथ मत करना. (४)
O Indra! The Stotas who want to enjoy more fruit quickly praise you in the same way that the som-kneaders do the stone. O Lord of wealth and Indra with horses called Hari! You share money with both the right and left hands. Don't you make us fail. (4)
ऋग्वेद (मंडल 5)
वृषा॑ त्वा॒ वृष॑णं वर्धतु॒ द्यौर्वृषा॒ वृष॑भ्यां वहसे॒ हरि॑भ्याम् । स नो॒ वृषा॒ वृष॑रथः सुशिप्र॒ वृष॑क्रतो॒ वृषा॑ वज्रि॒न्भरे॑ धाः ॥ (५)
हे कामवर्षक इंद्र! वर्षा करने वाला स्वर्ग तुम्हारी वृद्धि करे. हे वर्षा करने वाले इंद्र! तुम इच्छापूरक घोड़ों द्वारा ढोए जाते हो. हे शोभन ठोड़ी वाले, कल्याण वर्षी रथ वाले एवं वज्रधारी इंद्र! संग्राम में तुम हमारी रक्षा करो. (५)
O workman Indra! May the raining heaven increase you. O Indra who rains! You are carried by horse-full of desire. He is the one with the chin, the one with the kalyani varshi rath and the thunderbolt Indra! In battle you protect us. (5)
ऋग्वेद (मंडल 5)
यो रोहि॑तौ वा॒जिनौ॑ वा॒जिनी॑वान्त्रि॒भिः श॒तैः सच॑माना॒वदि॑ष्ट । यूने॒ सम॑स्मै क्षि॒तयो॑ नमन्तां श्रु॒तर॑थाय मरुतो दुवो॒या ॥ (६)
हे मरुतो! जिस अन्नस्वामी राजा श्रुतरथ ने हमें लाल रंग के दो घोड़े एवं तीन सौ गाएं दी थीं, उस तरुण राजा के लिए सभी प्रजाएं नम्र बनें. (६)
O Maruto! May all the people be humble to the young king who gave us two red horses and three hundred cows. (6)