हरि ॐ

ऋग्वेद (Rigved)

ऋग्वेद 5.38.1

मंडल 5 → सूक्त 38 → श्लोक 1 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

ऋग्वेद (मंडल 5)

ऋग्वेद: | सूक्त: 38
उ॒रोष्ट॑ इन्द्र॒ राध॑सो वि॒भ्वी रा॒तिः श॑तक्रतो । अधा॑ नो विश्वचर्षणे द्यु॒म्ना सु॑क्षत्र मंहय ॥ (१)
हे शतक्रतु इंद्र! तुम्हारे विशाल धन का दान महान्‌ है. हे सर्वद्रष्टा एवं शोभन धन वाले इंद्र! हमें महान्‌ धन प्रदान करो. (१)
O Sahartu Indra! The donation of your huge wealth is great. O indra with all-seer and shobhan wealth! Give us great money. (1)