ऋग्वेद (मंडल 5)
विश्वे॑ अ॒स्या व्युषि॒ माहि॑नायाः॒ सं यद्गोभि॒रङ्गि॑रसो॒ नव॑न्त । उत्स॑ आसां पर॒मे स॒धस्थ॑ ऋ॒तस्य॑ प॒था स॒रमा॑ विद॒द्गाः ॥ (८)
इस पूजनीया उषा का प्रकाश फैलते ही अंगिरागोत्रीय ऋषियों ने गायों को प्राप्त किया. गोशाला में दूध दुहा जाने लगा, क्योंकि सत्य मार्ग से सरमा ने गायों को देख लिया था. (८)
As soon as the light of this revered Usha spread, the Angiragotrian sages received the cows. The milk started to be milked in the goshala, because Sarma had seen the cows from Satya Marg. (8)