ऋग्वेद (मंडल 5)
स्व॒स्तये॑ वा॒युमुप॑ ब्रवामहै॒ सोमं॑ स्व॒स्ति भुव॑नस्य॒ यस्पतिः॑ । बृह॒स्पतिं॒ सर्व॑गणं स्व॒स्तये॑ स्व॒स्तय॑ आदि॒त्यासो॑ भवन्तु नः ॥ (१२)
हम कल्याण के लिए वायु की स्तुति करते हैं. सब लोकों के पालक सोम की भी हम प्रार्थना करते हैं. हम देवसमूह के साथ बृहस्पति की स्तुति कल्याण के लिए करते हैं. आदित्यगण हमारा कल्याण करें. (१२)
We praise the air for welfare. We also pray to the foster mon of all the lokas. We praise Jupiter with the god group for well-being. Adityas may do us well. (12)